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सात धातुएं और उनके बढ़ने या घटने से होने वाले रोग

  हमारे शरीर का निर्माण करने वाले तत्वों में धातुओं का महत्वपूर्ण स्थान है। ये शरीर का पोषण और निर्माण करते हैं साथ ही शरीर की संरचना में सहायक होते हैं। इसलिए इन्हें “धातु” कहा जाता है। आयुर्वेद में सात प्रकार की धातुओं के बारे में बताया गया है और इन्हें एक निश्चित क्रम में रखा गया है। हमारे शरीर की पूरी संरचना इन्हीं सातों धातुओं से मिलकर हुई है। इनमें से हर एक का अपना अलग ही महत्व है। तीनों दोषों की ही तरह इन सातों धातुओं का निर्माण भी पांच तत्वों (पंच महाभूत) से मिलकर होता है। हर एक धातु में किसी एक तत्व की अधिकता होती है। Contents 1 सात धातुओं के नाम 2 धातुओं का निर्माण कैसे होता है 3 1- रस धातु 3.1 रस धातु के कार्य 3.2 रस धातु बढ़ने के लक्षण 3.3 रस धातु में कमी के लक्षण 3.4 रस धातु के असंतुलन से होने वाले रोग 3.5 उपचार 4 2- रक्त धातु ( खून या ब्लड) : 4.1 रक्त धातु के कार्य : 4.2 रक्त धातु बढ़ने के लक्षण 4.3 रक्त धातु में कमी के लक्षण : 4.4 रक्त धातु के असतुलन से होने वाले रोग : 4.5 उपचार 5 3- मांस धातु 5.1 मांस धातु के कार्य 5.2 मांस धातु बढ़ने के लक्षण 5.3 मांस धातु की कमी के ल...
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कांसा वाटी मसाज

पैरों के तलवों पर #कांसे धातु की कटोरी से मालिश करना एक प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है, जिसे कांसा वाटी मसाज कहा जाता है।  यह मालिश सिर्फ आराम ही नहीं देती, बल्कि इसके कई गहरे शारीरिक और मानसिक फायदे भी हैं,,,,,, कांसे की धातु, जो तांबे और टिन का मिश्रण होती है, आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह मालिश शरीर के ऊर्जा बिंदुओं (मर्म) को उत्तेजित करती है, जिससे कई लाभ होते हैं। कांसे की कटोरी से मालिश के फायदे ,,,,,,,,, शरीर की गंदगी (टॉक्सिन) बाहर निकालना: कांसे की धातु में शरीर की गर्मी और विषाक्त पदार्थों (toxins) को खींचने का गुण होता है। जब तलवों पर तेल या घी लगाकर कांसे की कटोरी से मालिश की जाती है, तो कटोरी का निचला हिस्सा धीरे-धीरे काला या भूरा हो जाता है। यह इस बात का संकेत माना जाता है कि कटोरी शरीर से जमी हुई गंदगी को बाहर निकाल रही है।   तनाव और थकान दूर करना:  पैरों के तलवों में हजारों तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं। मालिश करने से ये तंत्रिकाएं शांत होती हैं, जिससे पूरे शरीर को गहरा आराम मिलता है।  यह दिन भर की थकान, त...

क्या सिर्फ पानी पी लेना ही गर्मियों में Hydrated रहने के लिए काफी है? 🌞💧

गर्मी बढ़ते ही हम सभी को बार-बार प्यास लगती है और हम ज्यादा पानी पीने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि खूब पानी पीने के बाद भी थकान, कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द या शरीर में भारीपन बना रहता है? कारण यह है कि शरीर को सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि Electrolytes (सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि) और सही Nutrition की भी आवश्यकता होती है। ━━━━━━━━━━━━━━━ 🌿 Hydration क्या है? Hydration का अर्थ केवल पानी पीना नहीं है। जब शरीर में पानी, खनिज (Minerals) और आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में बने रहते हैं, तब शरीर Hydrated माना जाता है। लेकिन जब पसीने, धूप, अधिक काम, तनाव या गलत खानपान के कारण शरीर से पानी और Electrolytes निकल जाते हैं, तब Dehydration शुरू हो जाता है। ━━━━━━━━━━━━━━━ ⚠️ Dehydration के सामान्य संकेत ✔ बार-बार प्यास लगना ✔ मुंह सूखना ✔ कमजोरी और थकान ✔ सिरदर्द ✔ चक्कर आना ✔ पेशाब का पीला होना ✔ चिड़चिड़ापन ✔ ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई ━━━━━━━━━━━━━━━ 🌿 गर्मियों में सिर्फ पानी क्यों पर्याप्त नहीं होता? मान लीजिए आपने 3-4 लीटर पानी पी लिया, लेकिन शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पोष...

भारतीय पुरुषों में पेट क्यों निकलता है?

और क्यों बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या तेजी से बढ़ने लगती है? आजकल बहुत से पुरुष एक ही समस्या से परेशान हैं — “ पेट निकलना ” कई लोग कहते हैं — “ उम्र के साथ तो पेट निकलता ही है…” लेकिन सच यह है कि सिर्फ उम्र जिम्मेदार नहीं होती। गलत खानपान, कम एक्टिविटी, तनाव, खराब नींद और शरीर की बदलती जरूरतों को नजरअंदाज करना — यही असली कारण हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि पेट सिर्फ बाहर की चर्बी नहीं है। धीरे-धीरे यही पेट शरीर के अंदर फैट जमा करने लगता है, जो हार्ट, लिवर, शुगर और हार्मोन पर असर डाल सकता है। 🌿 सबसे पहले समझिए — पेट क्यों निकलता है? बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ ज्यादा खाना ही वजह है। लेकिन असली कारण इससे कहीं ज्यादा गहरे हैं। ━━━━━━━━━━━━━━━ 🍞 1. डाइट में असंतुलन भारतीय खाने में अक्सर कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन कम होता है। सुबह चाय-बिस्किट दोपहर ज्यादा रोटी-चावल शाम स्नैक्स रात भारी खाना इस तरह की आदतें शरीर में फैट जमा करने लगती हैं। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो मसल्स कमजोर होने लगती हैं और पेट के आसपास फैट जमा होना शुरू हो जाता है। ━━━━━━━━━━━━━━━ 🪑 2. बैठने...

गर्मी और लू की समस्या से बचने के कुछ आसान उपाय

दिल्ली और आसपास के इलाकों में भले ही गर्मी और लू से कुछ राहत मिल गई हो लेकिन बिहार और आसपास के राज्यों में लू का कहर जारी है और लू से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं इससे बचने के कुछ आसान उपाय। इस वक्त आधा भारत गर्मी की समस्या से जूझ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या बिहार में देखने को मिल रही है जहां गर्मी और लू की वजह से अब तक 183 लोगों की मौत हो चुकी है। कड़ी धूप में काम करने वालों, गरीब तबके के लोगों, खिलाड़ियों, बच्चे, बूढ़े और बीमार लोगों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने के बाद उसका इलाज किया जाए इससे बेहतर है कि हम लू लगने से पहले ही अपना बचाव कर लें। लिहाजा इन जरूरी बातों का ध्यान रखें... गर्मी में लू और दूसरी समस्याओं से ऐसे बचें कैसे करें बचाव कुछ सावधानियां बरत कर लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है... - तेज गर्म हवा में बाहर जाने से बचें। नंगे बदन और नंगे पैर धूप में न निकलें। - घर से बाहर पूरी आस्तीन के और ढीले कपड़े पहनकर निकलें, ताकि उनमें हवा लगती रहे। - ज्यादा टाइट और गहरे रंग के कपड़े न पहनें। - सूती कपड़े पहनें। स...

Pancreas Health - क्या आपने कभी सोचा है कि 50 के बाद आपकी जिंदगी की क्वालिटी किस चीज पर सबसे ज्यादा निर्भर करती है?

हम दिल, हड्डियों और शुगर की बात तो करते हैं, लेकिन एक छोटा सा अंग है जो चुपचाप आपकी पूरी सेहत कंट्रोल करता है—पैंक्रियाज। अगर यह सही रहा, तो आपकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी और क्वालिटी दोनों बेहतर रह सकती हैं। पैंक्रियाज क्या है और क्यों इतना जरूरी है पैंक्रियाज शरीर का एक छोटा लेकिन बेहद अहम अंग है, जो पेट के पीछे स्थित होता है। इसका मुख्य काम दो तरह का होता है— पहला, यह इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाता है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं। दूसरा, यह डाइजेस्टिव एंजाइम बनाता है, जो खाने को सही तरीके से पचाने में मदद करते हैं। यानी अगर पैंक्रियाज सही काम नहीं करेगा, तो न सिर्फ डायबिटीज का खतरा बढ़ेगा, बल्कि पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाएगा। यही वजह है कि 50 के बाद इसकी देखभाल और भी जरूरी हो जाती है। क्यों 50 के बाद पैंक्रियाज पर ध्यान देना जरूरी है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की मरम्मत करने की क्षमता कम होती जाती है। पैंक्रियाज भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। अगर इस समय आपने सही खानपान और लाइफस्टाइल नहीं अपनाई, तो आगे चलकर डायबिटीज, पाचन समस्याएं और अन्य मेटाबॉलिक डिसऑर्डर हो सकते हैं। पैंक्रियाज को म...

Difference between Ayurveda and Naturopathy

  Ayurveda and Naturopathy are both natural, holistic health systems, but they differ significantly in origin and approach.  Ayurveda is an ancient Indian system focusing on balancing bodily energies (doshas: Vata, Pitta, Kapha) using herbs, diet, and lifestyle.  Naturopathy is a western-origin practice focusing on the body's self-healing through natural remedies like diet, sunlight, and water, often with less emphasis on specific, individualized herbal medicine.  Core Philosophy :  Ayurveda aims to balance the three doshas and align with nature's rhythms.  Naturopathy believes in the body's innate ability to heal itself through natural, non-invasive therapies. Treatment Methods :  Ayurveda often uses specific, complex herbal remedies, oils, and procedures like Panchakarma.  Naturopathy favors lifestyle changes, diet, fasting, hydrotherapy, and mud therapy. Dietary Approach :  Ayurveda suggests eating cooked, warm, and spiced food for better ...